Friday, November 30, 2012

गौहर महल ‘पॉटर्स मार्केट’ : माटी पर इठलाते ‘शब्दों’ की कहानी


भोपाल . ‘कुछ रंग हुए बदरंग, जड़ इतने कि चट्टान...’ किसी कवि की कविता की ये पंक्तियां लिखी हैं स्कल्पचर आर्टिस्ट निर्मला शर्मा की बनाई हुई पॉट में। वे गुरुवार से गौहर महल में शुरू हुए ‘पॉटर्स मार्केट’ पर अपनी कृतियों के साथ आई हैं। सिटी की आर्टिस्ट निर्मला कहती हैं, ‘मैं अपनी कृतियों में अक्सर कुछ चुनी हुई कविताओं के अंश लिखती हूं। ऐसा करने से उन्हें चैन की नींद आने लगी थी। ...और ऐसा मैं तब से कर रही हूं, जबसे कविताएं मेरे कवि पति को उनके सपने में तंग करने लगीं। सपने में वो कविता जिसमें कुछ हाथ नजर आते थे और उन्हें अपने कैप्टन बेटे के कश्मीर में शहादत की याद दिलाते थे। आज मेरे पति जितेंद्र कुमार को गुजरे 7 साल हो चुके हैं लेकिन मैंने पॉट पर कविताएं लिखना जारी रखा है। मिट्टी के पॉट बनाकर उन पर कविताएं लिखना मेरे लिए शहीद बेटे और पति की याद को मिट्टी में खोजने जैसा ही है।’ निर्मला ने आगे बताया, मेरा बेटा कैप्टन देवाशीष शर्मा कश्मीर में 10 दिसंबर 1994 को ऑपरेशन ‘रक्षक’ के दौरान शहीद हुआ था।

बेटे के लिए मां की ख्वाहिश ‘एक दिन मिट जाएगा माटी के मोल, जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल...’ गीत मानो निर्मला के इन ‘कविता-पॉट्स’ को चरितार्थ करता है। ये पॉट वे महज हजार रुपए में लोगों को सौंप देती हैं। हालांकि वे कहती हैं, ‘काश, ये पॉट्स कम-से-कम बिकें।’ ताकि वे इन पॉट्स को आपने शहीद बेटे की याद में खुद की ओर आयोजित होने वाले ‘आकाश सुकुमार’ में प्रदर्शित करना चाहती हैं। ये आयोजन 7 दिसंबर से सैनिक विश्राम घर में होगा, जिसमें वे हर साल की तरह अपनी कृतियां प्रदर्शित करेंगी। ...और इससे प्राप्त राशि को वे ‘सैनिक कल्याण कोष’ में दान कर देंगी। निर्मला और उनके जैसे 30 से अधिक कलाकार इस आयोजन में अपनी कला की अभिव्यक्ति कर रहे हैं। हर कृति अपनी और उन्हें गढऩे वाले की ऐसी ही एक कहानी प्रदर्शित करती सी प्रतीत होती है। यहां ‘आरुषि’, ‘मुस्कान’ और ‘नींव’ संस्था के बच्चों ने भी स्टॉल्स लगाए हैं।

 क्रिएटिव माइंड वर्सेस थिंकिंग माइंड यहां आई दुबई से आईं भारतीय मूल की सलमा मनेक्या कहती हैं, ‘मैंने यहां पिछले साल भी पार्टिसिपेट करती हूं। मेरे गले में इंजरी है, डॉक्टर एडवाइज देते हैं कि क्ले बनाना आपकी सेहत के लिए ठीक नहीं है। लेकिन इस आर्ट का मेरे लिए कोई एंड नहीं है।’ सलमा ने कई एब्सट्रैक्ट क्ले भी बनाए हैं। उन्होंने इंसानी दिमाग के आधे हिस्से के ‘क्रिएटिव माइंड’ के मुकाबले आधे हिस्से के ‘थिंकिंग माइंड’ को दिखाया है। वहीं, करप्शन पर चोट करते क्ले ‘द पॉवर ऑफ करप्शन’ में सिक्के से बंद कहिला का मुंह और आंखों पर पट्टी दिखाई है

कैनन - पावर शॉट एसएक्स50 एचएस' : ऑब्जेक्ट आएगा 54 गुना करीब

सिटी के लीडिंग गैजेट ब्रांड स्टोर्स अपने प्रोडक्ट्स पर हॉट डील्स और गिफ्ट ऑफर कर रहे हैं। गेम्स में 'फीफा' फेवरेट बना है, वहीं पीएस3 का स्पेशल क्रिकेट एडिशन पैक न्यू अराइवल है।

सीसीटीवी, मोबाइल, लैपटॉप, वेब, हैंडी, डिजिटल, लैपटॉप, टैबलेट और स्पाई कैमरे। दिन भर जाने ऐसे कितने ही कैमरे हमें देखते रहते हैं। लेकिन एक ऐसा कैमरा जिसे लोग देखना चाहेंगे वो सिटी के मार्केट में आया है। डीबी सिटी के कैनन शोरूम में आए 'कैनन : पावर शॉट एसएक्स50 एचएस' में 24 - 1200 एमएम कैमरा है। 50 गुना ऑप्टिकल और 4 गुना डिजिटल जूम के साथ यह कैमरा ऑब्जेक्ट को कुल 54 गुना पास ला सकता है। इसे आप ऑटो और मैन्युअल मोड में यूज कर सकते हैं। 12.1 मेगापिक्सल, फुल एचडी 1080 और 58 सीन्स इसके स्पेशल फीचर्स हैं।

29,995 रुपए कैनन प्राइज का यह कैमरा इस कैनन स्टोर में 29095 रुपए के 'बेस्ट बाय' ऑफर के साथ अवेलेबल है। इसका 2.8 इंच वैरी एंगल एलसीडी स्क्रीन इसे डिफरंट एंगल से फोटो खींचने में आसान बनाता है।


Wednesday, November 28, 2012

कार्मल कॉन्वेंट सीनियर सेकंडरी स्कूल : सिल्वर जुबली का कलरफुल सेलिब्रेशन


रतनपुर स्थित कार्मल कॉन्वेंट सीनियर सेकंडरी स्कूल का सिल्वर जुबली सेलिब्रेशन 'कार्मल असेन्सो' मंगलवार को आयोजित किया गया। 1988 में स्थापित हुए स्कूल के 25वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर स्टूडेंट्स ने कई कलरफुल परफॉर्मेंस दीं। इनमें 'द रसियंश', 'द वंडर फूड्स', 'द रिटर्न ऑफ सेंटियागो' और 'बटरफ्लाय डांस' जैसी कई प्रस्तुतियां शामिल रहीं। इस बीच स्टूडेंट्स ने अपने स्कूल के 25 साल के इतिहास की झलक प्रस्तुत की। इसमें स्कूल के स्पोट्र्स, कल्चरल और एकेडमिक अचीवमेंट्स को डांस और स्पीच के माध्यम से प्रस्तुत किया गया और पूर्व प्रिंसिपल्स की जानकारी भी दी गई। यहां बच्चों ने 'वेजिटेबल डांस' से सब्जियों की इंपॉर्टेंस बताई। वहीं, स्टूडेंट्स ने 'सुबह का भूला' नाटक का मंचन कर जॉइंट फैमिली में पैरेंटिंग से जुड़ी समस्याओं का हल और बेटियों की महत्ता के बारे में बताया। मछुआरों का ट्रेडिशनल डांस कार्यक्रम का खास आकर्षण रहा। इसके बाद भरतनाट्यम, कथक, कुचीपुड़ी और ओडिसी डांस की प्रस्तुतियां काफी सराही गईं। इस मौके पर डिपार्टमेंट ऑफ फूड, सिविल सप्लाइज, कस्टमर प्रोटेक्शन एंड ट्रांसपोर्ट के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी आईएएस अफसर एंथनी डि सा और मैपकॉस्ट के डायरेक्टर डॉ. प्रमोद कुमार वर्मा बतौर अतिथि उपस्थित रहे। साथ ही पूर्व आर्चबिशप डॉ. पास्कल टोप्पो और सीएमसी की मदर जेसी मारिया (प्रोविंशियल सुपीरियर) भी मौजूद रहीं। ईवेंट का समापन 'कार्मल एंथम' के साथ हुआ।

 

Tuesday, November 27, 2012

भोपाल हाट में नेशनल हैंडलूम एक्सपो : हैंडलूम्स की हैप्पी शॉपिंग

बड़े फेस्टिवल्स भले ही बीत गए हैं लेकिन भोपाल हाट में आयोजित ‘नेशनल हैंडलूम एक्सपो’ में गणपति अभी विराजे हुए हैं। मंगलमूर्ति के दर्शन कीजिए और 17 राज्यों से आए हैंडलूम्स की ‘हैप्पी-शॉपिंग’ शुरू कर दीजिए। मध्य प्रदेश हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम की ओर से आयोजित यह मेला 10 दिसंबर तक जारी रहेगा। यहां फूड जोन और रोजाना शाम सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी खास आकर्षण हैं। एक्सपो में हैंडलूम्स की कई वैरायटी और ऑप्शंस उपलब्ध हैं।

साड़ी पर श्रीराम-कृष्ण कथा : एक्सपो के एक स्टॉल पर नालंदा बिहार से रतनलाल मधुबनी साड़ी लाए हैं। कोसा सिल्क पर पैंसिल से स्कैचिंग के बाद इस पर वेजिटेबल कलर से हैंड-पेंटिंग की जाती है। इन पेंटिंग्स में श्रीराम कथा व श्रीकृष्ण की लीलाओं का चित्रण किया गया है। इसमें मुख्यत: सीता स्वयंवर और राधा-कृष्ण रास की कथाओं को चुना गया है। एक साड़ी पर पेंटिंग बनाने में एक महीने से अधिक का समय लगता है। पीढिय़ों से इस काम में लगे यह बुनकर कोसा, मूंगा, कटिया, भिच्चा, एरी, टसर और मटका सिल्क के 200 से अधिक पैटर्न के फैब्रिक लेकर आए हैं। शर्ट, कुर्ता, सूट आदि के लिए यह फैब्रिक्स 120 से 800 रुपए प्रति मीटर की रेंज में अवेलबल हैं। 


हाइलाइट्स

  • अब तक 1.33 करोड़ रुपए का बिजनेस हुआ
  • 4.25 एकड़ क्षेत्र में लगा है एक्सपो
  • 1200 स्क्वेयर फीट में 120 लगे हैं स्टॉल्स
  • 16 राज्यों की 72 सोसायटी आईं
  • 480 लाभ-ग्राही बुनकर आए

अट्रैक्शन और भी हैं : यहां लगा ‘जूट सेंटर’ स्टॉल आपको सबसे इकनॉमिकल शॉपिंग का ऑप्शन देता है। दरअसल, इस स्टॉल्स से सारे जूट आइटम्स गोविंदपुरा स्थित ‘मृगनयनी’ हस्तशिल्प सेंटर पर बनते हैं। यहां इनकी डायरेक्ट सेलिंग होती है। यहां जूट से बने हैंड-पर्स, हैंडबैग, जेंट्स एंड लेडीज जैकेट, टिफिन बैग, झोला बैग, डोर मेट, पॉट हैंगर और सिंथेटिक सोफा कवर अवेलेबल हैं और यहां टेबल मेट व हैंगिंग झूले की भी वाइड रेंज है। पालना, किड्स, सिंगल सीटर, डबल सीटर, स्कवेयर और राउंड शेप झूले 300 से 1500 रुपए के बीच मिल रहे हैं। 
  

कॉलेज गल्र्स भी लगा सकेंगी स्टॉल : एक्सपो में 29 नवंबर को पेंटिंग एंड ड्रॉइंग और 30 को निबंध लेखन कॉम्पिटीशन आयोजित किया जाएगा। वहीं, 2 दिसंबर को रंगोली मेकिंग और 3 को मेहंदी कॉम्पिटीशन होगा। ये कॉम्पिटीशंस दोपहर 1 बजे से होंगे जिसमें स्टूडेंट्स भी पार्टिसिपेट कर सकेंगे। 4 दिसंबर को कॉलेज गोइंग गल्र्स स्टॉल डिस्प्ले कॉम्पिटीशन में हिस्सा ले सकेंगी। पार्टिसिपेंट्स को कॉम्पिटीशन के लिए जरूरी चीजें भी दी जाएगी। इसके लिए भोपाल हाट स्थित आयोजक कार्यालय में पहले से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसकी पार्टिसिपेशन फीस नहीं है। विनर्स को 1500 रुपए तक के प्राइज दिए जाएंगे।

आगामी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां : एक्सपो के दौरान शाम 6.30 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। 27 नवंबर को यहां मुकेश तिवारी द्वारा ‘गजल नाइट’ होगी। 28 नवंबर को यहां ‘वेव्स बैंड’ की ओर से रॉक बैंड परफॉर्मेंस होगी। 29 को गोपाल मिश्रा की ओर से बांसुरी वादन, 30 को रूपेश लाल की ओर से गजल प्रस्तुति और 1 दिसंबर को अभिलाषा ग्रुप की ओर से नए फिल्मी गीतों का कार्यक्रम होगा।

Tuesday, March 13, 2012

तंबूरे की आवाज ने मुझे बना दिया कबीर गायक


म्यूजिक एलबम की लॉन्चिंग के लिए शहर आए पद्मश्री कबीर गायक प्रहलाद सिंह टिपानिया से बातचीत



अमित पाठे . भोपाल

2011 में कबीर गायन के लिए पद्मश्री प्राप्त गायक प्रहलाद सिंह टिपानिया इस विधा के कोहिनूर की तरह है। उन्होंने कबीर गायक की पारंपरिक मालवी शैली को देश-विदेश के बड़े मंचों पर प्रस्तुत किया है। उन्हें संगीत नाट्य अकादमी और मध्यप्रदेश का शिखर सम्मान जैसे कई अवार्ड मिले हैं। उन्होंने वार्षिक सूफी संगीत समारोह ‘रूहानियत’ सहित कई बड़े आयोजनों और विश्वविद्यालयों में अपने गायन की रूमानियत का अहसास कराया है। वे भजन गायिका भावना त्रिपाठी के एलबम ‘मैया तेरी ज्योत’ के म्यूजिक लॉन्च पर भोपाल पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने सिटी भास्कर से खास बातचीत की।

कबीर गायन की ओर रुझान कैसे जागा?

इस संगीत की विधा मुझे परंपरा या विरासत में नहीं मिली। मैं तो एक शिक्षक हूं। मैंने अपने जीवन में पहली बार 1979 में तंबूरा देखा और सुना। उसकी आवाज ने मुझे इतना आकर्षित किया कि मैं इस संगीत की ओर खिंचा चला गया। अब कई शहरों के लोग मुझसे इस संगीत की शिक्षा की शिक्षा लेने आते हैं जिनकी संख्या सैकड़ों में है। मेरे दो बेटे अजय और विजय ने भी इस विधा को अपनाया है।

कबीर गायन के प्रचार-प्रसार के लिए क्या कर रहे हैं?

हाल में बीकानेर में कबीर यात्रा का आयोजन हुआ। इसमें देश-विदेश से लोग शामिल हुए। लोगों के बीच पारंपरिक रूप से रची-बसी लोक रचनाओं को हम लिपिबद्ध करके उसे प्रकाशित कर रहे हैं ताकि आने वाली पीढी़ उसे अपना सके। हम सदगुरू कबीर स्मारक सेवा शोध संस्थान, उज्जैन का संचालन कर रहे हैं, जहां कबीर संगीत के प्रति रुझान रखने वालों को इस संगीत की शिक्षा दी जाती है। इस संस्थान से हमने दो दर्जन से अधिक कबीर संगीत एलबम भी तैयार किए है जिन्हें काफी पसंद किया गया है। कबीर गायन परंपरा पर 4 शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री भी बनाई है।

आगामी प्रस्तुतियों की क्या योजना है?

हम 24 मार्च को लुनियाखेड़ी में 16वें कबीर महोत्सव का आयोजन कर रहे हैं। केरल की पार्वती बाउल, बैंगलुरू से शबनम विरमानी, मुंबई से भावना त्रिपाठी और चेन्नई से अनुराधा श्रीराम परशुराम इस आयोजन में विशेष रूप से प्रस्तुतियां देंगी। 14 मार्च को चंडीगढ़ में एक कार्यक्रम होना तय है।

एलबम के म्यूजिक रिलीज पर कैसे आना हुआ?

आरती बैनर की ओर से प्रस्तुत इस एलबम में 8 भजन, स्तुति व आरती शामिल हैं। सभी में भावना ने अपनी आवाज दी है। इस एलबम के गीत मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, उतर प्रदेश और बिहार की लोकधुनों व संस्कृति पर आधारित है। भावना मूलत: टीकमगढ़ की हैं। उन्होंने मुझसे संगीत की सीख ली है। उसी की वजह से मैं यहां आया।

कबीर महोत्सव का मकसद?

‘कबीर खड़े बाजार में, सबकी चाहे खैर, ना काहु से दोस्ती, ना काहु से बैर...’ इन पंक्तियों से ही कबीर महोत्सव का मकसद समझा जा सकता है। हम कबीर पंथ, उनकी विचारधारा, सोच और मार्गदर्शन का प्रचार-प्रसार करते हैं। इसमें लोगों में प्रेमभाव और भाईचारा को बढ़ाने के भाव से देश भर के कबीर पंथी लोग, कबीर संगीत व गायन प्रेमी तथा संत जन आते हैं।





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Friday, February 24, 2012

कवि गोपालदास 'नीरज' से रूबरू... 'तन रोगी मन भोगी मेरी आत्मा योगी रे'





राजेश गाबा . साहित्य के उज्ज्वल नक्षत्र 'नीरज' का नाम सुनते ही सामने एक ऐसा शख्स उभरता है जो स्वयं डूबकर कविताएं लिखता है और पाठक को भी डुबा देने की क्षमता रखता है।'नीरज' जब मंच पर होते हैं तब उनकी बेजोड़ कविता और लरजती आवाज श्रोता वर्ग को दीवाना बना देता है। पद्मभूषण गीतकार, कवि गोपालदास 'नीरज' जिंदादिल व्यक्तित्व के धनी। उन्होंने अपनी मर्मस्पर्शी काव्यानुभूति और सरल भाषा से हिन्दी कविता को एक नया मोड़ दिया है। हरिवंश राय बच्चन के बाद नई पीढ़ी को सर्वाधिक प्रभावित किया।

'कविता मैं नहीं लिखता वो तो भीतर से कोई लिख जाता है, गीत स्वयं शब्दों में उतर आते हैं। मैं बहुत पढ़ता हूं, मनन करता हूं। यही इस उम्र में भी मेरी तेज याददाश्त का राज है।' यह कहना है 88 वर्षीय पद्मभूषण गीतकार, कवि गोपालदास नीरज का। मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के सम्मान समारोह में शिरकत करने शहर आए 'नीरज' से सिटी भास्कर की विशेष बातचीत के अंश...

'लिखे जो खत तुझे...', 'ऐ भाई जरा देख के चलो...', 'फूलों के रंग से...', जैसे कई दिलकश गीतों के रचयिता 'नीरज' ने कहा, मुझे भी हमेशा विवादास्पद माना गया, कोई मुझे निराशावादी समझता है, कोई भोगवादी तो कोई सुरवादी। मैंने लिखा, 'हम तो इतने बदनाम हुए इस जमाने में यारों सदियां लग जाएंगी हमें भुलाने में..।' (हंसते हुए) फिर जो विवादास्पद होता है वही लोकप्रिय होता है।

मैं कवि त्रिमुखी पीड़ा का : मैं त्रिमुखी पीड़ा का कवि हूं। शरीर की पीड़ा रोगी रहने के कारण मैंने भोगी। तन रोगी रहा बचपन से। जब भूख लगती थी तो खाने के लिए पैसा नहीं था और जब पैसा हुआ तो भूख खत्म हो गई। प्रेम की पीड़ा भोगी। जिससे प्रेम किया वो मिला नहीं, वो मिले जिनसे प्रेम नहीं हो सका। तीसरे अकेलेपन के कारण अपने भीतर प्रवेश किया तो आत्मा की एकांतता का पता चला। मैंने कहा 'तन रोगी, मन भोगी मेरी आत्मा योगी रे..।' यानी त्रिमुखी पीड़ा, शरीर की पीड़ा, मानसिक पीड़ा व आत्मा की पीड़ा का कवि कहो।
लोकप्रियता भागी मेरे पीछे-पीछे

मैं ये मानता हूं कि बिना कष्ट उठाए बिना संघर्ष किए कोई भी मंजिल प्राप्त नहीं होती। बचपन में मेरे पिता की मृत्यु हो गई। तभी से मेरा संघर्ष शुरू हो गया। तभी से दूसरे के घर रहने के लिए चला गया। 10 साल वहां रहा। सो अकेलापन रहा, तो अंतर्मुखी हो गया। अंतर्मुखी होने पर एक दिन अपने आप कविता फूट गई। कविता लिखना शुरू कर दिया। मैंने गाते सुना कवि सम्मेलन में, मुझे लगा कि इससे अच्छा तो मैं गा लेता हूं। मैंने गाना शुरू कर दिया और लोकप्रिय होने लगा। लोकप्रियता तो मेरे पीछे-पीछे भागती रही। हरिवंशराय बच्चन की 'निशा निमंत्रण' पढ़कर मैंने कविता लिखनी शुरू की। उनसे ही मैंने प्रेरणा ली थी।

लिखता हूं शुद्ध कविताएं

मैं तो शुद्ध कविता लिखता हूं। शुद्ध कविता में जीवन के बहुत से आयाम आते हैं। कहीं आशा है, कहीं निराशा भी..., जीवन है तो मृत्यु भी..., कहीं जय, कहीं पराजय है, कहीं सुख है तो कहीं दुख है..। संसार का रूप ही द्वंद्वमय है। शेक्सपियर से एक बार किसी ने पूछा कि आप ट्रेजडी के साथ कॉमेडी क्यों लिखते हैं? तो उन्होंने कहा, 'आई वांट टू होल्ड मिरर अप टू दी नेचर।' इसमें ट्रेजडी भी है और कॉमेडी भी।

अर्थ जीवन का उद्देश्य नहीं

ग्लोबलाइजेशन के युग में कविताएं भी ग्लोबल हो रही हैं। इस युग में अर्थ भी जरूरी है। पर यह जीवन का माध्यम है लेकिन उद्देश्य नहीं हो सकता। अर्थ जरूरी है पर अर्थ के पीछे पागल होकर दौडऩा मूर्खता है।

एसडी बर्मन मैलोडी किंग


एसडी बर्मन के साथ मैंने काम किया था। शंकर जय किशन, रोशन, मदन मोहन से भी जुड़ा रहा। पर एसडी बर्मन साहब ने जिस तरह मेरे गीत बनाए वैसा किसी और ने किया हो, मुझे लगता नहीं। वो नए-नए प्रयोग करते थे। मैंने भी नए-नए प्रयोग किए भाषा के। मुझे अपना सबसे ज्यादा पसंद है गीत 'फूलों के रंग से, दिल की कलम से...'। इसकी विशेषता ये है कि इसमें अंतरा पहले है मुखड़ा बाद में। ये एक एक्सपेरिमेंटल गीत था। एसडी बर्मन मैलोडी किंग थे।

सहज के लिए भाषा सहज

मेरी भाषा के प्रति लोगों की शिकायत रही कि न तो वह हिंदी है और न उर्दू। उनकी यह शिकायत सही है और इसका कारण यह है कि मेरे काव्य का जो विषय 'मानव प्रेम' है उसकी भाषा भी इन दोनों में से कोई नहीं है। हृदय में प्रेम सहज ही अंकुरित होता है और वह जीवन में सहज ही हमें मिलता है। जो सहज है उसके लिए सहज भाषा ही अपेक्षित है।

'पुण्य देवता, पाप पशु प्रेम बनाता है आदमी'


हिंदी भवन में पद्मभूषण गीतकार, कवि गोपालदास 'नीरज' का सम्मान समारोह और काव्य पाठ आयोजित


सिटी रिपोर्टर . 'जो पुण्य करता है वह देवता बन जाता है, जो पाप करता है वह पशु बन जाता है और जो प्रेम करता है वो आदमी बन जाता है। वक्त से आगे देख पाने की सोच, जीवन दर्शन, गीत और कविता कहने के अंदाज, खुशमिजाज व्यक्तित्व के धनी, शब्दों के जादूगर पद्मभूषण गोपालदास नीरज ने हिंदी भवन के सभागार में बुधवार को जब यह पंक्तियां मंच से अपने खास अंदाज में पढ़ी तो समूचा सभागार हिंदी गीत, कविता के स्वर्णिम हस्ताक्षर के सम्मान में तालियों से गूंज उठा। इस कविता के माध्यम से नीरज जी ने सरल सहज शब्दों में पुरजोर तरीके से इस बात को रखा कि किसी मनुष्य के लिए किसी जीवन की परिभाषा इस बात पर निर्भर करती है कि अब तक उसने जिंदगी के किन रंगों का स्वाद चखा है। मौका था मप्र राष्ट्रभाषा प्रचार समिति द्वारा आयोजित गीत ऋषि नीरज के सार्वजनिक सम्मान समारोह का।

88 वर्षीय नीरज जी अपने चाहने वाले श्रोताओं से इस तरह मुखातिब हुए : 'आप सबने मेरे संबंध में बहुत सी बातें कही। कुछ कही, कुछ अनकही। किसी की ज्यादा प्रशंसा करने का मतलब होता है उसके रेट को बढ़ा देना (मुस्कुराते हुए कहा)। हमारे दीपक जी मुझे बहुत प्यार करते हैं। मैं तो बहुत साधारण आदमी हूं, फकीरों तरह रहता हूं। महान शब्द मुझे नहीं पता। आपने मुझे सम्मान दिया, इतना प्यार दिया उसके लिए आप सबका आभारी हूं।' उन्होंने आगे कहा, मैं तो समय को आत्मा मानता हूं। दर्शन के बिना कविता हो ही नहीं सकती। हम माया के फेर में पड़े रहते हैं जबकि हम सब जानते हैं कि 'श्वांस भी अपनी नहीं और तो और लाश भी अपनी नहीं।' एक कविता रचना के साथ कवि की मृत्यु हो जाती है और हर कविता के साथ उसका नया जन्म होता है। ग्लोबलाइजेशन के इस युग का देवता विज्ञान है, जिसकी मृत्यु पर विजय पाने की तैयारी है। समारोह में 'नीरज' पर केंद्रित अंतरा पत्रिका का विमोचन हुआ। साथ ही उनका सार्वजनिक सम्मान समारोह हुआ। यहां जस्टिस आरडी शुक्ला, कैलाश चंद्र पंत विशेष रूप से उपस्थित थे। समारोह का संचालन अक्षरा के संपादक नरेंद्र दीपक ने खास अंदाज में किया।

संगीतबद्ध होगा निराला-नीरज संगीत का रचनाकर्म : संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकान्त शर्मा ने कहा, रवींद्र संगीत की तरह मप्र में निराला और नीरज की रचनाएं संगीतबद्ध कराकर संरक्षित की जाएंगी। इसके लिए संगीत विश्वविद्यालय में अलग से प्रभाग खोला जाएगा। राज्य शासन द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया जाएगा। कवि ध्रुव शुक्ल ने नीरज की काव्य यात्रा की व्याख्या रोचक और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत की। संस्कृति मंत्री ने अन्तरा पत्रिका के नीरज विशेषांक और ध्रुव शुक्ल द्वारा रामभक्ति पर रचित 'राम बोला' सीडी का विमोचन भी किया।

यह सुनाया 'नीरज' ने-

'छिप-छिप अश्रु बहाने वालों, मोती व्यर्थ लुटाने वालों, कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है'

'दोस्तों हर पल को जीयो अंतिम ही पल मान,अंतिम पल है कौन सा कौन सदा है जान'

'ज्ञानी हो फिर भी न कर दुर्जन संग निवास, सर्प-सर्प है भले ही मणि हो उसके पास'

गीतकार गोपालदास 'नीरज' का हिन्दी भवन में आयोजित कार्यक्रम में सम्मान किया गया।




Monday, February 20, 2012

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल का राष्ट्रीय नाट्य उत्सव- अरण्यनाद


नाटक 'मोहे पिया'- योद्धाओं के शौर्य की दास्तान

Sunday, February 19, 2012

भारत भवन भोपाल की 30वीं सालगिरह पर पद्मश्री पं. उल्हास कशालकर का गायन और मोहम्मद सरोवर हुसैन का सारंगी वादन


KBC5 पंचकोटि महा-मनी सुशील कुमार ने ये किया पैसों का...

'सुशील बाबू का हाल बा...?

कौन बनेगा करोड़पति-५ में ५ करोड़ रुपए जीतने वाले एकमात्र विनर सुशील कुमार शनिवार को भोपाल आए। उन्होंने सिटी भास्कर से खास बातचीत में जीतने के बाद सपनेंवाली जिंदगी जीने के पहलू सांझा किए।

अमित पाठे . भोपाल

पांच करोड़ी सुशील, जैसा हमने उन्हें केबीसी-५ में देखा था आज भी बिल्कुल वैसे ही। वे शनिवार को एक सामाजिक कार्यक्रम में शिरकत करने इंदौर-पटना एक्सप्रेस ट्रेन से भोपाल आएं। वही अंदाज, हेयरस्टाइल और ड्रेसिंग। फॉर्मल स्काई ब्लू शर्ट पर हाफ स्लीव स्वैटर और ब्लैक ट्राउजर। और सबसे खास उनका वही हसमुख चेहरा और डाउन-टू-अर्थ मिलनसार व्यवहार। केबीसी-५ में ५,००,००,००० रुपए जीतने वाले व्यक्ति से जब कार्यक्रम में कोई अपरिचित कहता है- 'का हो सुशील बाबू का हाल बा...' (क्या सुशील बाबू क्या हाल है) तो करोड़पति और मनरेगा के ब्रांड ए बेसडर सुशील खिलखिला कर जवाब देते हैं- 'ठीक बानू' (ठीक है)। सुशील और उनकी जिंदगी में कोई बदलाव आए भी है? आइए जानते हैं-

केबीसी में 'पंचकोटि महामनी' बनने के बाद सपने को जीना कैसा लग रहा है? (पांच करोड़ संस्कृत में पंचकोटि)
जवाब- ये सपनें में जीने की तरह है। इतनी तकलीफों, संघर्षों, हार आदि के बाद ये मुकाम पाना ईश्वर के सहयोग से ही संभव हुआ।

केबीसी में पांच करोड़ जीतने और बिग बी से मिलने में तुलना?
जवाब- बिग बी से मिलना तो हर किसी का सपना होता है मैंने उन पलों को भरपूर दिल से जिया है। पांच करोड़, बिग बी से मुलाकात से किसी तरह ज्यादा नहीं है।

केबीसी में जाने से पहले क्या कुछ सोच रखा था?
जवाब- नहीं, कुछ भी नहीं सोचा था। २५ लाख की उ मीद थी लेकिन ५० लाख से उपर की सोच ही नहीं थी। जीतने के ४५ दिन बाद लगभग १.५ करोड़ कटने के बाद सारा प्राइज मनी मिल गया।

जीतने के बाद अपना कौन सा ड्रीम पूरा किया?
जवाब- मेरा घर बहुत टूटा-फूटा था उसकी मर मत करवाई। इसके बाद मोतिहारी में २५ लाख रुपए की जमीन खरीदी। रकम का बड़ा हिस्सा अपने माता-पिता के नाम जमा करवा दिया। घर के किसी सदस्य और पत्नि ने कोई विशेष मांग नहीं की। मैंने भी अपने लिए कुछ नहीं खरीदा। मेरी पगार चार अंकों में ६००० रुपए थी इसलिए हर बार जीतने के बाद चैक में जीरो गिन रहा था।

मिडिल क्लास के आइडल के नाते क्या मैसेज देंगे?
जवाब- दिखावा करना मुझे पसंद नहीं है, मैं हाई सोसायटी के लोगों के बीच जाता हूं तो लगता है मेरी यह जिंदगी नहीं हो सकती। जो दिल में है वो करना चाहिए।


'बिग बॉस में जाने के लिए पत्नी ने मन किया'

श्रद्धा जैन . भोपाल

सबसे पहले बदलावों की बात करते हैं, आपके रहन-सहन में इस प्रसिद्धि-पैसे ने क्या बदलाव किए?
जवाब - बहुत लोग मिलने आते हैं इसलिए पत्‍‌नी को खाना ज्यादा बनाना पड़ता है। दूसरा बदलाव मेरे पहनावे में हुआ कि शर्ट तो पहले जैसी ही होती है लेकिन अब उसे इन करके पहनने लगा हूं।

बिग बॉस ने आपको आमंत्रित किया था, आपने मना कर दिया, क्यों?
जवाब - पत्‍‌नी ने उसके कुछ एपिसोड देख लिए थे कि उनमें क्या-क्या होता है? वो उससे डर गई थी इसलिए उसने मना कर दिया था। (धीरे से हंसते हुए) लेकिन मेरा थोड़ा मन तो था जाने का।

आपने हनुमानजी से 1 करोड़ रुपए जीतने की मन्नत मांगी थी और पूरा होने पर सोने की परत वाली चांदी की गदा चढ़ाने की भी बात कही थी, क्या हुआ? कैसी गदा बनवाई?
जवाब - अभी नहीं चढ़ाया, कुछ दिन बाद चढ़ाऊंगा। गदा बनवाने ऑर्डर दे दिया है। (हंसते हुए) अब हनुमानजी को चढ़ाना है तो भारी तो होगी।

इनाम की राशि को सबसे पहले कहां खर्च किया? पत्‍‌नी को कुछ तोहफा दिया।
जवाब - कुछ कर्ज चुकाना था, वो चुकाया और जमीन खरीदी। पत्‍‌नी को तो कुछ नहीं दिया। वैलेंटाइंस डे पर भी कुछ कार्यक्रमों के चलते बाहर था।

केबीसी और बाकी रियल्टी शो में क्या अंतर पाते हैं। सभी के  विजेताओं को ज्यादातर भुला दिया जाता है, आपके मामले में ऐसा नहीं हुआ।
जवाब - मैं केबीसी का विजेता हूं। केबीसी सबसे अलग है क्योंकि इसमें अमिताभ जी हैं और इसमें ज्ञान की परीक्षा होती है। इसलिए बाकी शो से इसकी तुलना संभव ही नहीं है।

जब लोग आपसे मिलते हैं तो  उनका आपसे पहला सवाल क्या होता है?
जवाब - (जोर से हंसते हुए) सिर पर पानी क्यों डाला था? (5 करोड़ जीतते ही सुशील कुमार ने पानी से भरा गिलास अपने सिर पर उड़ेल लिया था)

आईएएस की तैयारी करने का विचार था, कहां तक पहुंची तैयारी?
जवाब - अभी तो कार्यक्रमों में इतना व्यस्त हूं कि समय ही नहीं मिला। लगता है 2013 में ही कुछ हो पाएगा।



व्यक्तित्व की खास बातें
* बेहद मिलनसार और हंसमुख स्वभाव। पूरी सहजता के साथ हर छोटे-बड़े
से मिलते हैं और हाल-चाल पूछना नहीं भूलते।
* मोबाइल नंबर सबको बताते हैं वो भी हिन्दी में।
* कपड़े केबीसी के दौरान पहने गए कपड़ों की तरह एकदम साधारण।
* शेव भी समय मिलने पर करते हैं।