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Tuesday, March 13, 2012

तंबूरे की आवाज ने मुझे बना दिया कबीर गायक


म्यूजिक एलबम की लॉन्चिंग के लिए शहर आए पद्मश्री कबीर गायक प्रहलाद सिंह टिपानिया से बातचीत



अमित पाठे . भोपाल

2011 में कबीर गायन के लिए पद्मश्री प्राप्त गायक प्रहलाद सिंह टिपानिया इस विधा के कोहिनूर की तरह है। उन्होंने कबीर गायक की पारंपरिक मालवी शैली को देश-विदेश के बड़े मंचों पर प्रस्तुत किया है। उन्हें संगीत नाट्य अकादमी और मध्यप्रदेश का शिखर सम्मान जैसे कई अवार्ड मिले हैं। उन्होंने वार्षिक सूफी संगीत समारोह ‘रूहानियत’ सहित कई बड़े आयोजनों और विश्वविद्यालयों में अपने गायन की रूमानियत का अहसास कराया है। वे भजन गायिका भावना त्रिपाठी के एलबम ‘मैया तेरी ज्योत’ के म्यूजिक लॉन्च पर भोपाल पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने सिटी भास्कर से खास बातचीत की।

कबीर गायन की ओर रुझान कैसे जागा?

इस संगीत की विधा मुझे परंपरा या विरासत में नहीं मिली। मैं तो एक शिक्षक हूं। मैंने अपने जीवन में पहली बार 1979 में तंबूरा देखा और सुना। उसकी आवाज ने मुझे इतना आकर्षित किया कि मैं इस संगीत की ओर खिंचा चला गया। अब कई शहरों के लोग मुझसे इस संगीत की शिक्षा की शिक्षा लेने आते हैं जिनकी संख्या सैकड़ों में है। मेरे दो बेटे अजय और विजय ने भी इस विधा को अपनाया है।

कबीर गायन के प्रचार-प्रसार के लिए क्या कर रहे हैं?

हाल में बीकानेर में कबीर यात्रा का आयोजन हुआ। इसमें देश-विदेश से लोग शामिल हुए। लोगों के बीच पारंपरिक रूप से रची-बसी लोक रचनाओं को हम लिपिबद्ध करके उसे प्रकाशित कर रहे हैं ताकि आने वाली पीढी़ उसे अपना सके। हम सदगुरू कबीर स्मारक सेवा शोध संस्थान, उज्जैन का संचालन कर रहे हैं, जहां कबीर संगीत के प्रति रुझान रखने वालों को इस संगीत की शिक्षा दी जाती है। इस संस्थान से हमने दो दर्जन से अधिक कबीर संगीत एलबम भी तैयार किए है जिन्हें काफी पसंद किया गया है। कबीर गायन परंपरा पर 4 शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री भी बनाई है।

आगामी प्रस्तुतियों की क्या योजना है?

हम 24 मार्च को लुनियाखेड़ी में 16वें कबीर महोत्सव का आयोजन कर रहे हैं। केरल की पार्वती बाउल, बैंगलुरू से शबनम विरमानी, मुंबई से भावना त्रिपाठी और चेन्नई से अनुराधा श्रीराम परशुराम इस आयोजन में विशेष रूप से प्रस्तुतियां देंगी। 14 मार्च को चंडीगढ़ में एक कार्यक्रम होना तय है।

एलबम के म्यूजिक रिलीज पर कैसे आना हुआ?

आरती बैनर की ओर से प्रस्तुत इस एलबम में 8 भजन, स्तुति व आरती शामिल हैं। सभी में भावना ने अपनी आवाज दी है। इस एलबम के गीत मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, उतर प्रदेश और बिहार की लोकधुनों व संस्कृति पर आधारित है। भावना मूलत: टीकमगढ़ की हैं। उन्होंने मुझसे संगीत की सीख ली है। उसी की वजह से मैं यहां आया।

कबीर महोत्सव का मकसद?

‘कबीर खड़े बाजार में, सबकी चाहे खैर, ना काहु से दोस्ती, ना काहु से बैर...’ इन पंक्तियों से ही कबीर महोत्सव का मकसद समझा जा सकता है। हम कबीर पंथ, उनकी विचारधारा, सोच और मार्गदर्शन का प्रचार-प्रसार करते हैं। इसमें लोगों में प्रेमभाव और भाईचारा को बढ़ाने के भाव से देश भर के कबीर पंथी लोग, कबीर संगीत व गायन प्रेमी तथा संत जन आते हैं।





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