म्यूजिक एलबम की लॉन्चिंग के लिए शहर आए पद्मश्री कबीर गायक प्रहलाद सिंह टिपानिया से बातचीत
| ||||
|
अमित पाठे . भोपाल
| ||||
कबीर गायन की ओर रुझान कैसे जागा? इस संगीत की विधा मुझे परंपरा या विरासत में नहीं मिली। मैं तो एक शिक्षक हूं। मैंने अपने जीवन में पहली बार 1979 में तंबूरा देखा और सुना। उसकी आवाज ने मुझे इतना आकर्षित किया कि मैं इस संगीत की ओर खिंचा चला गया। अब कई शहरों के लोग मुझसे इस संगीत की शिक्षा की शिक्षा लेने आते हैं जिनकी संख्या सैकड़ों में है। मेरे दो बेटे अजय और विजय ने भी इस विधा को अपनाया है। कबीर गायन के प्रचार-प्रसार के लिए क्या कर रहे हैं? हाल में बीकानेर में कबीर यात्रा का आयोजन हुआ। इसमें देश-विदेश से लोग शामिल हुए। लोगों के बीच पारंपरिक रूप से रची-बसी लोक रचनाओं को हम लिपिबद्ध करके उसे प्रकाशित कर रहे हैं ताकि आने वाली पीढी़ उसे अपना सके। हम सदगुरू कबीर स्मारक सेवा शोध संस्थान, उज्जैन का संचालन कर रहे हैं, जहां कबीर संगीत के प्रति रुझान रखने वालों को इस संगीत की शिक्षा दी जाती है। इस संस्थान से हमने दो दर्जन से अधिक कबीर संगीत एलबम भी तैयार किए है जिन्हें काफी पसंद किया गया है। कबीर गायन परंपरा पर 4 शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री भी बनाई है। आगामी प्रस्तुतियों की क्या योजना है? हम 24 मार्च को लुनियाखेड़ी में 16वें कबीर महोत्सव का आयोजन कर रहे हैं। केरल की पार्वती बाउल, बैंगलुरू से शबनम विरमानी, मुंबई से भावना त्रिपाठी और चेन्नई से अनुराधा श्रीराम परशुराम इस आयोजन में विशेष रूप से प्रस्तुतियां देंगी। 14 मार्च को चंडीगढ़ में एक कार्यक्रम होना तय है। एलबम के म्यूजिक रिलीज पर कैसे आना हुआ? आरती बैनर की ओर से प्रस्तुत इस एलबम में 8 भजन, स्तुति व आरती शामिल हैं। सभी में भावना ने अपनी आवाज दी है। इस एलबम के गीत मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, उतर प्रदेश और बिहार की लोकधुनों व संस्कृति पर आधारित है। भावना मूलत: टीकमगढ़ की हैं। उन्होंने मुझसे संगीत की सीख ली है। उसी की वजह से मैं यहां आया। कबीर महोत्सव का मकसद? ‘कबीर खड़े बाजार में, सबकी चाहे खैर, ना काहु से दोस्ती, ना काहु से बैर...’ इन पंक्तियों से ही कबीर महोत्सव का मकसद समझा जा सकता है। हम कबीर पंथ, उनकी विचारधारा, सोच और मार्गदर्शन का प्रचार-प्रसार करते हैं। इसमें लोगों में प्रेमभाव और भाईचारा को बढ़ाने के भाव से देश भर के कबीर पंथी लोग, कबीर संगीत व गायन प्रेमी तथा संत जन आते हैं। |
Journalist by nature. Occasional FBवाला writer, rarely photographer, 6 day designer & one day Bachelor.
Showing posts with label Dainik Bhaskar Bhopal. Show all posts
Showing posts with label Dainik Bhaskar Bhopal. Show all posts
Tuesday, March 13, 2012
तंबूरे की आवाज ने मुझे बना दिया कबीर गायक
Saturday, January 28, 2012
Monday, January 23, 2012
Subscribe to:
Posts (Atom)








