Showing posts with label sitar player pandit ravishankar. Show all posts
Showing posts with label sitar player pandit ravishankar. Show all posts

Friday, December 14, 2012

मायूस हुए सितार के तार : सितार वादक पं. रविशंकर

विश्व विख्यात सितार वादक पं. रविशंकर का निधन पूरे कला जगत के लिए गहरा आघात है। पं. रविशंकर मैहर के महान संगीतज्ञ उस्ताद अलाउद्दीन खां के शिष्य थे। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग ने उन्हें वर्ष 1987-88 में शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में प्रतिष्ठित राष्ट्रीय कालिदास सम्मान से विभूषित किया था। उनके चयन की ज्यूरी में पं. कुमार गंधर्व, पीएल देशपांडे, उस्ताद जिया मोहिउद्दीन डागर, डॉ. नारायण मेनन और बीवीके शास्त्री शामिल थे। इस अवसर पर उनके सितार वादन की सभा भी भारत भवन में आयोजित हुई थी।

 संगीत के प्रखर नक्षत्र थे :राज्यपाल राम नरेश यादव ने कहा है कि वे भारतीय संगीत के एक प्रखर नक्षत्र थे। उन्होंने भोपाल के कला-केन्द्र भारत भवन के ट्रस्टी के रूप में स्व. पंडित रविशंकर के योगदान की सराहना करते हुए मध्य प्रदेश से उनके लगाव को भी याद किया।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पंडित रविशंकर के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और कहा कि उन्होंने हमारी शास्त्रीय संगीत की विरासत को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके सितार-वादन में दिव्यता की अनुभूति होती है।


हमें गर्व है उन पर...
संस्कृति एवं जनसंपर्क मंत्री लक्ष्मीकान्त शर्मा ने कहा, पं. रविशंकर बीसवीं शताब्दी के महान कलाकार थे और नई सदी में भी पूरा एक दशक उनके कला वैभव का साक्षी रहा है। मप्र को इस बात का गौरव है कि उसे पं. रविशंकर को सम्मानित करने का सौभाग्य मिला।

 वो पल अनमोल थे... :
 वरिष्ठ रंगकर्मी आलोक चटर्जी ने कहा कि विश्व व भारतीय संगीत के लिए यह अपूर्णीय क्षति है। उन्होंने सितार को वैश्विक पहचान दी है। उन्होंने विदेशी कलाकारों के साथ भी संगीत के क्षेत्र में काम किया और विदेशियों को भी सितार वादन सिखाया। जब मैं छठवीं क्लास में मैहर गया था। वहां पंडित जी अलाउद्दीन खां साहब से मिलने पहुंचे हुए थे। उन्होंने वहां स्टेशन पर ही सितार बजाना शुरू कर दिया था। मुझे भारत भवन में उनकी 19८4 से 1987 के बीच की 3 प्रस्तुतियां याद हंै। एक बार उन्होंने 2 घंटे तक लगातार प्रस्तुति दी थी। 
भारत भवन में आयोजित राष्ट्रीय कालिदास अलंकरण समारोह की तस्वीर।
साथ में हैं मशहूर पेंटर मकबूल फिदा हुसैन

सीख दे गए युवाओं को : साहित्यकार बद्र वास्ती ने कहा कि स्व. पंडित जी का जाना न सिर्फ संगीत बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत के लिए भी एक भारी नुकसान है। उन्होंने जिस रास्ते पर चलकर दुनिया भर में देश का नाम रोशन किया था, उसी रास्ते पर युवाओं को भी चलना होगा।

गायक रफी शब्बीर ने कहा कि अब सिर्फ उनकी यादें ही शेष रह गई हैं। पंडित रविशंकर जैसा महान व्यक्ति दुनिया में सिर्फ एक ही होता है।


वरिष्ठ शास्त्रीय नृत्यांगना लता मुंशी ने कहा कि पंडित जी के जाने से संगीत क्षेत्र में आई कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा। कई कलाकार आएंगे लेकिन उनके जैसा इंसान और उनका स्थान पाने वाला शायद ही कोई हो पाए।